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आपका जन्मदिन

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 आपका जन्मदिन सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने। लब्ध्वा शुभं जन्मदिवसेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्‌।। अर्थात जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव सुगंधित रहता है, उसी तरह यह जन्मदिवस आपके हर दिन, हर पल को मंगलमय बनाए यही मेरी कामना है। जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें! मुझे उम्मीद है कि आपके जन्मदिन का नया साल आपके लिए कामयाबी और ढेरों खुशियाँ लेकर आएगा आप जीवन में जो कुछ भी चाहते हैं,  वह सब आपको मिले,  आपके सभी सपने सच हों और आपकी सभी आशाएँ पूरी हों।  आप दीर्घायु रहो और आरोग्य रहो,  अपने जीवन में यश प्राप्त करो,  जीवन में सफलता हासिल करो  मैं आपको जन्म दिवस पर यही मंगलकामनाएं देता हूँ ! आपका ज्यादा समय नही लूंगा लेकिन आपका उपहार अभी बाकी है जो की इसी में मैने नीचे लिखा है, शायद आपको पसंद आए......! आपके अवतरण दिवस पर मेरी ओर से एक छोटी सी रचना उपहार स्वरूप भेंट करता हूं - आपको बधाई हो जन्मदिन की मुझे बहुत प्यारी लगी खुशी इस दिन की हर साल आता रहें यह दिन खुशी का आपको प्यार मिले हर किसी का पूरी हो आपकी सारी मुर...

तू और तेरी याद

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 तू और तेरी याद  सुनो जब भी तन्हा बैठा करता हूं तेरा ही ख्वाब देखा करता हूं तेरे साथ बिताए हर लम्हे को उन कुछ मिनटों में फिर से जिया करता हूं बोलो न ऐसा क्या था इस मोहब्बत में जो हर दफा तुम्हे ही सामने ला खड़ा कर देती है तेरी वो मुस्कान, और वो तुम्हारी झील सी आंखे क्यूं मुझे हर बार तेरी ओर खींचे ला देती है बोलो न क्या तुम्हे अब भी मुझसे मोहब्बत है क्या मैं अब भी तुम्हारे ख्यालों में आता हूं क्या तुम्हे भी मेरी कमी महसूस होती है क्या मैं तुम्हें याद आता हूं सुनो मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं तुम मेरे लिए बहुत खास हो मैं तुम्हें बेइंतहा मोहब्बत करता हूं तुम मेरी हर एक स्वांस हो सुनो न जब भी किसी कपल को देखता हूं मुझे वहा तुम और मैं नजर आते हैं जब भी कोई चित्रहार देखता हूं तुम्हारे एहसास मुझे हरदम सताते है सुनो जान बिन तुम्हारे सब कुछ अधूरा सा लगता है तुम्हारी कमी का एहसास हमेशा होता है कभी कभी तुम मुझे प्रत्यक्ष दिखती हो लेकिन कुछ देर बाद सब भ्रम सा लगता है बोलो ना प्रिय क्या मेरा प्यार तुम्हे झूठा लगता है क्या मैं तुम्हे खुश नही रख पाता था प्रिय तुम मेरी आंखों की रोशनी हो तुम मेरे...

तेरी आंखें

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तेरी आंखें  जब भी तेरी आंखों में देखता हूं खो जाता हूं उनकी गहराइयों में मैं आता है नजर मुझे सारा संसार तेरी इन सुरमई आंखो में ऐसा क्या जादू करती है तेरी निगाहें जो एक ही पल में मुझे घायल कर जाती है जब भी देखता हूं तेरी आंखों में खो जाता हूं तेरे खयालों में मेरी आंखें सिर्फ तेरा ही दीदार करना चाहती है पर तेरे ही खयालों में रोया करती है तुम मेरे लिए क्या है यह मैं बता नहीं सकता चाहता तो हूं दिलों जान से तुम्हें मगर प्यार भरी बातें कर नहीं सकता तेरे होठों की भी क्या कहने हैं लगता है जैसे कमल की पंखुड़ियां है इतनी खूबसूरत है तु इतनी खूबसूरत है तू कि कलिया भी तुझसे शर्मा जाए जब भी तुझे देखूं मैं सांस मेरी वहीं थम जाए तेरे चेहरे का नूर मैं बयां करूं कैसे जब भी देखता हूं तुझे खुद को समझाता हूं जैसे तैसे हां जी प्यार करता हूं तुझसे दिलों जान से मैं तभी तो कहता हूं तेरी आंखों में देखते ही खो जाता हूं मैं।

वो दोस्ती

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वो दोस्ती मेरा भी कोई बहुत खास था जिस पर मुझे बहुत नाज़ था जो भी बातें होती थी दिल में उसे मैं सब कुछ बताया करता था उसकी भी सुनता और अपनी भी सुनाया करता था उससे मैं सब कुछ सांझा करता था जो बात किसी से ने कहता वो राज भी उसके सामने खोला करता था सुबह उसके बातो से शुरू होती मेरी रातें उसके शुभ रात्रि बोलने से होती थी हम दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी उसके गुस्से के सामने हार जाया करता था पता नहीं किसकी नज़र लग गई इस दोस्ती को  जुदा हो गए दोनो , जो कभी एक दूसरे में खुद को देखा करते थे  नजरो से दूर हो गये हम दोनों

होली मुबारक

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होली मुबारक  होली के रंग तवे चढ़ेला जब घर में बड़ा बुजुर्ग होला सभन जाना के साथ खेले के बा होली नई नवेली दुल्हन हो चाहें  साथ में हो उनकर सहेली बुरा न मानो होली है गाए के बा सभन जाना के होली के रंग से नहाए के बा एक दिन पहिले करल जाला होलिका दहन जवन कर देवे ला सभ कष्ट के निवारण रंग चाहे कौनो हो निखार खूब आवेला साथे रंग जा तू हो मनवा हमरो करेला फुलवरी, बजका, मिठाई अलग अलग व्यंजण बा आवे लागल बा खुशबू स्वादिष्ट पकवान के आजा तनी पिलेबे के ठंडई में मिल अल भांग के तब झूमल गाईल जाई आज सांझ के लगावे के थोड़ा थोड़ा रंगवा साथ बजावे के ढोलक और मृदंग के खिलल रहे चेहरा रऊन सब के हर सुबह शाम के मुबारक भेजत बानी सभन जाना के ई पवित्र त्योहार के

चाय और तुम

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चाय और तुम हल्की सी ठंड में  बालकनी में लिए बैठे है तेरी यादों का शहर  दिल में बसाए बैठे है हाथ में चाय और यादों में तुम पंछियों की चहचहाट सुन लगता है गुन गुना रही हो तुम कभी कभी सोचता हु बैठे इस बालकनी में क्या मेरा ख्याल आता है तेरे जहन में इस जगह पर बैठे बैठे मन में एक भवर सा उमड़ आता है तेरे ख्यालों में दिल खो सा जाता है चाय में मिठास इस चाय के साथ तेरे एहसास हर सुबह सताते है बालकनी में लगे झूले भी तेरी कमी महसूस कराते है तेरे आने का इंतजार ये हर हमेशा करते रहते है इन झूलों के भी मेरी तरह ऊंचे ऊंचे है ख्वाब तू हो इस झूले पर हमेशा मेरे साथ चाय की चुस्की और घर की बात दोनो बैठे डाले हाथों में हाथ। - अभय दुबे

मेरे प्यारे पापा

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मेरे प्यारे पापा   मेरी पहचान आपसे है, मेरी खुशियां आपसे है, आप मेरे लिए क्या हो मैं क्या कहूं, कहने को है पैरों के नीचे जमीन, मेरे लिए तो आसमा आप है । हंसते और हंसाते आप है, हमारे लिए खुशियां लाते आप है, पिता का रुतबा सबसे ऊंचा है, भगवान के रूप समान है, पिता की उंगली थाम चलो तो, सारे रास्ते आसान है । आपको कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं मैं, पूरे करूंगा आपके सभी अरमान मैं, आपकी दुआओं से जिंदगी चलती है, बस खुदा से एक फरमान है, आप रहे खुश हमेशा-हमेशा, यहीं रब को पैगाम है।